विजयराघवगढ़ सरकारी आईटीआई में खुलेआम हो रहा फर्जीवाड़ा,कायदे-कानून हुए दरकिनार, फर्जी अंकसूचियों से दिए जा रहे प्रवेश


पोल खुलने के बाद भी मौन साधकर बैठे जिम्मेदार, नहीं हुई कार्रवाई

कटनी।(17 अक्टूबर ) विजयराघवगढ़ स्थित सरकारी आईटीआई इन दिनों फर्जीवाड़े की सराय बन गया है जहां फर्जी अंकसूची लेकर आने वाले छात्रों को प्रवेश देने में कोई परहेज नहीं किया जा रहा है। प्रवेश प्रक्रिया के पूर्व अंकसूचियों की जांच पड़ताल करना मुनासिब नहीं समझा जाता और मामला उजागर होने के बाद भी फर्जीवाड़ा करने वाले छात्रों की करतूत पर पर्दा डालने में भूमिका निभाई जा रही है। 

न एफआईआर हुई न, न प्रवेश  किया निरस्त

और तो और मार्कसीट फर्जी होने की हकीकत सामने आने के बाद भी आईटीआई में पदस्थ जिम्मेदार अमले ने लापरवाही दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी जबकि ऐसे छात्र के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने के साथ ही प्रवेश निरस्त किया जाना चाहिए थे। सारा माजरा संज्ञान में होने के बाद भी मामले में किसी प्रकार की कार्रवाई न किया जाना निश्चित ही इस बात का प्रमाण है कि आईटीआई के जिम्मेदारों की सरपरस्ती में ही फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जाता है और लेन-देन करके मामले में पर्दा डाल दिया जाता है। 

फर्जी अंकसूची से मिला प्रवेश

यहां जो मामला सामने आया है उसके अनुसार ग्राम बंजारी निवासी एक छात्रा द्वारा विजयराघवगढ़ स्थित सरकारी आईटीआई में प्रवेश के लिए आवेदन किया था जिस दौरान छात्रा द्वारा कूटरचित मार्कसीट संलग्न की गई थी। आवेदन के साथ संलग्न अंकसूची में छात्रा को 75 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण होना दर्शाया गया है जबकि वास्तविक अंकसूची में छात्रा कृपांक से उत्तीर्ण हुई है। 

कलई खुलने के बाद भी जिम्मेदार मौन

छात्रा द्वारा लगाई गई फर्जी मार्कसीट के आधार पर आईटीआई में उसे इलेक्ट्रीशियन एनसीबीटी में प्रवेश दे दिया गया जबकि पात्र और योग्य छात्र प्रवेश से वंचित रह गए। इस फर्जीवाड़े की कलई खुलते ही आईटीआई को जानकारी से अवगत कराया गया लेकिन आज दिनांक तक किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं की गई जबकि कूटरचना का अपराध दर्ज कराने के साथ ही प्रवेश निरस्त करने की कार्रवाई की जानी चाहिए थी। 

फर्जीवाड़े को दबाने का कर रहे प्रयास

यहां गौर करने योग्य है कि विजयराघवगढ़ क्षेत्र में फर्जी अंकसूचियों का गोरखधंधा पूरे शबाब पर है यह कहना गलत नहीं होगा। इस मामले पर कार्रवाई होने से न सिर्फ कूटरचना करने वालों को सीख मिलती बल्कि फर्जी अंकसूची बनाने वाले गिरोह का पर्दाफास भी आसानी से हो जाता लेकिन आईटीआई में पदस्थ अधिकारी कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण फर्जीवाड़े के इस गंभीर मामले को दबाने का प्रयास तो किया ही जा रहा है इसके अलावा फर्जी मार्कसीट तैयार कर गोरखधंधा संचालित करने वाले आरोपियों को भी बचाने की कोशिश की जा रही है। 

जांच में सामने आ सकते हैं कई मामले

सूत्रों की मानें तो ग्राम बंजारी निवासी ही एक युवक द्वारा फर्जी मार्कसीट बनवाने का गोरखधंधा काफी समय से किया जा रहा है लेकिन सबूत न होने के कारण पुष्टि नहीं की जा रही है। न जाने ऐसे कितने छात्रों द्वारा फर्जी अंकसूचियों के बलबूते प्रवेश हासिल किया जा चुका होगा और योग्य छात्रों के हक पर डाका डालने का कृत्य किया गया होगा। आखिर आईटीआई के जिम्मेदारों द्वारा इस मामले में कार्रवाई करने से परहेज क्यों किया जा रहा है यह समझ से परे है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस पूरे प्रकरण में आईटीआई में पदस्थ जिम्मेदारों की भूमिका भी संदिग्ध है और जांच में ऐसे और भी मामले सामने आ सकते हैं। 

Share on Google Plus

About Abhishek Mishra

www.katninews.com is first Hindi News Portal of Katni District. You can get latest Hindi News updates.

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें