बद् से बदतर हुए प्रियदर्शिनी बस स्टेंड के हालात,बेपरवाह दुकानदारों ने सड़क तक जमा लिया कब्जा

प्लेटफार्म में भी अवैध दुकानों की भरमार, फैली अराजकता

कटनी।(12 अक्टूबर )शहर का विशाल बस प्रियदर्शिनी बस स्टेंड बदहाली का शिकार हो चुका है जहां सवारियों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना तो करना ही पड़ता है इसके अलावा दुकान दारों की दबंगई भी परेशानियों में इजाफा करने में कसर बाकी नहीं रख रही जबकि दुकानों की हद पार कर दुकान संचालक सड़क तक अतिक्रमण करने से नहीं चूक रहे। बस स्टेंड में व्याप्त अराजकता के कारण यात्रियों को सुविधाओं की बजाय महज परेशानियां ही मिल रही हैं।

अवैध दुकानों से भी होती है टैक्स वसूली

नगर निगम के मातहतों द्वारा बस स्टेंड में संचालित हो रही दुकानों से कर वसूली तो की जाती है लेकिन दुकानें वैध रूप से संचालित हो रही हैं या अवैध हैं इस पर गौर करना जरूरी नहीं समझा जाता। यह कहना गलत नहीं होगा कि टेक्स के रूप में चंद रुपयों की लालच में नगर निगम प्रशासन के जिम्मेदार अमले द्वारा ही अवैध दुकान संचालकों को संरक्षण देने का काम किया जा रहा है जिसके चलते अराजकता चरम पर है। 

कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहे जिम्मेदार

वैसे तो कई बार नगर निगम प्रशासन द्वारा ठेलों में दुकानें संचालित करने वाले छोटे दुकानदारों को नियमों की दुहाई देकर खदेडऩे का काम किया गया और कर्तव्यपरायणता के नाम पर कार्रवाई के नमूने दिखाए गए लेकिन बस स्टेंड के प्लेटफार्म में अनाधिकृत रूप से संचालित हो रही दुकानों को हटाने और सड़क में दुकान संचालित करने वाले दुकानदारों को हिदायत देने या उन्हें नियमों का पाठ पढ़ाने की जहमत जिम्मेदार क्यों नहीं उठा पाते यह समझ से परे है। 

दर्शन योग्य भी नहीं प्रियदर्शिनी बस स्टेंड

बस स्टेंड की हालत देखने पर साफ जाहिर हो रहा है कि देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरागांधी के नाम पर करोड़ों की लागत से बनाए गए प्रियदर्शिनी बस स्टेंड की अनदेखी जिम्मेदारों द्वारा की जा रही है और इसी उपेक्षा की वजह से बस स्टेंड की हालत बद से बदतर ही होती जा रही है। आलम यह है कि नालियों की साफ-सफाई समय-समय पर न होने से नालियां बजबजा रही हैं जिनकी दुर्गंध के कारण बस स्टेंड जाने वाली सवारियों को सांस लेना भी दूभर हो जाता है। 

दबंगई पूर्वक सड़क पर चला रहे दुकान

इसके अलावा दुकान संचालकों की मनमानी के चलते सड़क तक पसरे दुकानों के अतिक्रमण के कारण वाहनों के निकलने की जगह भी नहीं बचती और कई बार बस स्टेंड में ही जाम जैसे हालातों से साक्षात्कार हो जाते हैं। वहीं सड़क पर अतिक्रमण कर दुकान संचालित करने वाले दुकानदार खुले शब्दों में यह जवाब देते हैं कि टेक्स देते हैं मुफ्त में दुकान नहीं चलाते जिसे जहां शिकायत करना हो कर ले। 

कर रहे अनदेखी, दे रहे संरक्षण

आलम देखकर तो यही जाहिर होता है कि नगर निगम का जिम्मेदार अमला या तो नपुंसकता का प्रमाण दे रहा है या फिर दुकानों के अतिक्रमण की जानकारी होने के बावजूद भी दुकान संचालकों पर कृपादृष्टि बरसा रहा है। ऐसे आलम में बस स्टेंड की बिगड़ी तस्वीर सुधरने की भला कल्पना भी कैसे की जा सकती है। दूसरी ओर बस स्टेंड परिसर में खड़ी होने वाली बसों के चालकों द्वारा भी रही सही कसर पूरी कर दी जाती है। 

बेतरतीब खड़ी होती हैं बसेंं

सैकड़ोंं की तादात में बेतरतीब खड़ी होने वाली बसों के कारण लोगों को आने जाने में दिक्कतों का सामना तो करना ही पड़ता है वहीं प्रियदर्शिनी बस स्टेंड की फिजा पर भी बट्टा लग कर रह जाता है। बसों के खड़े होने के लिए यूं तो प्लेटफार्म बनाए गए हैं लेकिन मैं जो चाहूं वो करूं मेरी मर्जी की तर्ज पर बस चालकों द्वारा आड़े तिरछे वाहन खड़े कर व्यवस्था के मुंह पर तमाचा मारने का काम किया जा रहा है। बस स्टेंंड की बदहाल स्थितियां और बिगड़ी फिजा को सुधारने के लिए न तो नगर निगम प्रशासन ही सार्थक पहल करना मुनासिब समझ रहा न ही जनप्रतिनिधियों को ही दरकार है।

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