डीडी कांड के मास्टर माइंड को गिरफ्तार करने में कोताही बरत रही पुलिस,खुली हवा में घूम रहे शातिर अपराधी, जांबाज पुलिस के मुहाफिजों ने साधी चुप्पी

कटनी।(21 नवम्बर ) जिले में हुए शराब ठेके के दौरान फर्जीवाड़े के पीछे अपनी मुख्य भूमिका निभाने व डीडी कांड के मास्टरमाईंड बल्लन दत्त तिवारी को गिरफ्तार करने की बात तो दूर जिले की पुलिस अब तक बल्लन व उसके साथी पुष्पेंद्र का सुराग भी हासिल नहीं कर पाई है। शराब ठेके की प्रक्रिया के दौरान शासन को लगभग 40 करोड़ रुपयों की चपत लगाने वाले शातिर अपराधी खुली हवा में सांस ले रहे हैं जबकि पुलिस के जांबाज मुहाफिज चुप्पी साध कर बैठे हुए हैं। 

नकारा साबित हो रहा पुलिस का मुखबिर तंत्र

हद तो इस बात की है कि डीडी कांड के प्रमुख आरोपी व उसके सहयोगी की पतासाजी में पुलिस का मुखबिर तंत्र नकारा साबित होकर रह गया है जबकि उक्त दोनों आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई महज कागजों तक ही सीमित रह गई जबकि आरोपी को पकडऩे के सार्थक प्रयास पुलिस द्वारा नहीं किए जा रहे हैं। बल्लन की गिरफ्तारी पुलिस के लिए चुनौती बनी हुई है लेकिन लाख प्रयासों के बावजूद बल्लन  पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया है। 

नहीं किए जा रहे ठोस प्रयास

देखने में आ रहा है कि नवागत पुलिस अधीक्षक गौरव तिवारी द्वारा प्रभार ग्रहण करने के साथ ही शहर की फिजा को सुधारने की कवायद प्रारंभ की गई व लंबे समय से ढीले चल रहे पुलिसिया सिस्टम के कलपुर्जों को भी सुधारने में कोई कसर नहीं छोड़ी गई लेकिन तेज तर्रार एसपी के निर्देशों के बावजूद भी पुलिस मास्टरमाइंड बल्लन को पकडऩे में क्यों कामयाब नहीं हो पाई है यह समझ से परे है। पूर्व में इस संबंध में चर्चा के दौरान एसपी द्वारा कहा गया था कि बल्लन व उसके सहयोगियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन प्रयास अब तक विफल क्यों हैं यह तो पुलिस अधिकारी ही जानें

कार्रवाई की जहमत नहीं उठा रहा पुलिस प्रशासन

जिले भर मेंं शराब का अवैध कारोबार करने वाले शराब माफियाओं के विरुद्ध ताबड़तोड़ कार्रवाई का सिलसिला जारी किया गया था जिस दौरान जप्त किए गए अवैध शराब के जखीरे, शराब डीडी कांड के मास्टरमाइंड बल्लन की होने की जानकारी पुलिस सूत्रों द्वारा दी गई थी परंतु बल्लन की गिरफ्तारी के लिए किसी प्रकार के ठोस प्रयास नहीं किए गए। प्रशासन द्वारा शातिर अपराधी व उसके सहयोगी की चल-अचल संपत्ति की कुर्की करने तक की जहमत नहीं उठाई गई जिससे कहीं न कहीं पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना लाजिमी ही है।

अब तक सुरक्षित हैं अपराधियों के गिरेबान 

पुलिस द्वारा जितनी सक्रियता के साथ अवैध शराब के ठिकानों की पतासाजी कर उस पर तात्कालिक कार्रवाई करने का सिलसिला जारी किया गया था अगर उतनी सक्रियता के साथ बल्लन तिवारी की पतासाजी करने में भूमिका निभाई जाती तो बल्लन सलाखों के पीछे होता यह कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी। यूं तो किसी भी संगीन अपराध से पुलिस द्वारा पर्दा उठाने में ज्यादा देर नहीं लगाई जाती लेकिन पुलिस का खुफिया तंत्र बल्लन का सुराग जुटाने में अपाहिज सा प्रतीत हो रहा है।

ढीले पड़े एसपी के तेवर, बेकार हुई ईनाम की घोषणा

डीडी कांड की जांच के दौरान तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे व आबकारी अधिकारी आरसी त्रिवेदी के विरुद्ध लोकायुक्त द्वारा एफआईआर दर्ज कराई गई थी और उसके बाद उक्त दोनों अधिकारियों को कटनी से हटाने के साथ ही पुलिस अधीक्षक गौरव राजपूत का तबादला भी कर दिया गया था लेकिन शराब ठेके  में फर्जीवाड़े से लेकर डीडी कांड की कूटरचना करने व अपनी काली करतूतों से जिला प्रशासन की छबि को दागदार बनाने में अहम भूमिका अदा करने वाले बल्लनदत्त तिवारी को पकडऩे के लिए पुलिस द्वारा कोई सार्थक उपाय नहीं किए गए। इस मामले में पुलिस अधीक्षक के तेवर भी जहां ढीले प्रतीत हो रहे हैं तो वहीं अपराधियों के सिर पर की गई ईनाम की घोषणा भी बेकार साबित होकर रह गई है।

बौने साबित हो रहे पुलिस के हाथ

सूत्रों की मानें तो बल्लन तिवारी के पकड़ जाने के बाद अगर उसने मुंह खोला तो कई नामी चेहरे बेनकाब हो जाएंगे संभवत: इसी के चलते स्थानीय पुलिस द्वारा बल्लन का सुराग न मिलने की बात कहकर उच्चाधिकारी को भ्रमित करने का प्रयास किया जा रहा हो। बल्लन की गिरफ्तारी न होने के पीछे कमी क्या है यह कहना तो मुनासिब नहीं होगा लेकिन यह कहना अतिशयोक्ति भी नहीं होगी कि ईमानदार व सख्त पुलिस कप्तान के निर्देशों के बाद भी असली आरोपी अर्थात बल्लन तिवारी के गिरेबान तक पहुंच पाने में पुलिस के लंबे हाथ बौने साबित हो रहे हैं।

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