नियमों के विपरीत शहरी क्षेत्र में चल रहीं डेयरियां,प्रदूषण व गंदगी से परेशान लोग, जिम्मेदारों को नहीं परवाह

निगमाध्यक्ष के ध्यानाकर्षण के बाद भी नहीं जाग रहा ननि प्रशासन

कटनी। शहर में सघन बस्ती के बीच डेयरी फार्म संचालित होने पर प्रतिबंध के बावजूद नगर नगम सीमा अंतर्गत घनी आबादी वाले क्षेत्रों में दर्जनों डेयरी संचालित हो रही हैं लेकिन नियम विरुद्ध तरीके से चल रही डेयरियों पर नगर निगम प्रशासन की नजरें इनायतें नहीं हो रही हैं। शहर के अंदर सघन बस्तियों में कई डेयरियां संचालित हैं जिनसे क्षेत्रों में गंदगी और प्रदूषण फैल रहा है। निगमाध्यक्ष द्वारा पत्र लिखकर नगर निगम का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया था लेकिन नतीजा सिफर ही है।

प्रदूषित वातावरण में संक्रमण का खतरा

नियमों को ताक में रखकर शहर के भीतर बस्तियों में व मेन बाजारों में भैंस पालन डेयरी व्यवसाय बेखौफ चल रहे हैं और डेयरियों में पलने वाले मवेशियों से निकलने वाला गोबर, मूत्र व अन्य कचरों को फेंकने के लिए डेयरियों के आस-पास ही कूरे का स्थान या घूरा बनाया जाता है जिससे क्षेत्रों मेंं गंदगी व बदबू का आलम रहता है। प्रदूषित वातावरण में लोगों का सांस लेना भी दूभर हो जाता है तो वहीं मच्छरों के पनपने से संक्रमण फैलने का अंदेशा भी बना रहता है। 

बलाए ताक पर कायदे-कानून

ध्यान देने योग्य है कि मप्र शासन के नगरीय निकाय प्रशासन द्वारा प्रदेश के समस्त नगर पालिक निगम क्षेत्रों के लिए दूध डेयरी व्यवसाय व दूध डेयरियां संचालित करने के लिए एक समान नियम कानून बनाए गए हैं। देखा जाए तो दूसरे शहरों में वातावरण को शुद्ध बनाए रखने के लिए शहर से बाहर डेयरी फार्म संचालित किए जाते हैं लेकिन कटनी जिले में प्रशासनिक अधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण घनी बस्ती वाले क्षेत्रों में ही डेयरी फार्म चल रहे हैं जिसका खामियाजा लोगों को परेशान होकर भुगतना पड़ रहा है। 

यातायात भी होता है बाधित

और तो और डेयरियों से निकल कर भैंसों के झुंड जब सड़कों पर गुजरते हैं तो लोगों को वहां से गुजरना भी दूभर हो जाता है। भैंसों की लंबी कतारें बीच सड़क से  गुजरती हैं जिसके कारण आवागमन की सुविधा पर भी बट्टा लगकर रह जाता है। जहां एक ओर शहर के बीच चल रहे डेयरी फार्मों के कारण लोगों को प्रदूषित वातावरण का दंश झेलना पड़ रहा है तो वहीं यातायात भी बाधित होता है लेकिन नगर निगम प्रशासन इस मामले में कार्रवाई करने की बजाय डेयरी संचालकों को खुली छूट देने की भूमिका अदा कर रहा है।

अनदेखी कर रहे जिम्मेदार

सूत्रों की मानें तो डेयरी संचालकों की दंबगई के कारण लोग विरोध करने में कतराते हैं तो वहीं नगर निगम प्रशासन भी इस मामले से पूरी तरह अनदेखी करने में ही भूमिका निभा रहा है। झर्रा टिकुरिया, शिवनगर, लखेरा, बरगवां, पुरानी बस्ती, कुठला आदि क्षेत्रों में नियमों को बलाए ताक रखकर डेयरी संचालित हो रही हैं लेकिन जिम्मेदार ध्यान देना मुनासिब नहीं समझ रहे। यह कहना गलत नहीं होगा कि ननि प्रशासन की भर्राशाही के कारण शासन के नियम निर्देश रौंदे जा रहे हैं। 

निगमायुक्त ने लिखा था पत्र

शहर में आम जनता के लिए परेशानी का सबब बन चुकी डेयरियों के संबंध में निगमाध्यक्ष संतोष शुक्ला द्वारा निगमायुक्त संजय जैन को पत्र लिखकर व डेयरियों को विस्थापित कराने की मांग की थी लेकिन अभी तक इस ओर किसी प्रकार की कार्रवाई शुरू नहीं की गई। निगमाध्यक्ष ने बताया कि शहर के कई वार्डों में नागरिकों द्वारा डेयरियां संचालित की जा रही हैं जिससे वार्डों में गंदगी व प्रदूषण पनप रहा है और इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखकर निगमायुक्त का ध्यान आकर्षण कराया गया था।
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