जननी एक्सप्रेस योजना में लापरवाही का घुन,वाहनों के नहीं हैं रजिस्ट्रेशन, जीपीआरएस सिस्टम का भी रता-पता

कटनी। (06 अक्टूबर ) जिला अस्पताल में प्रसूतिका महिलाओं को सुरक्षित लाने ले जाने के लिए लगाए गए जननी एक्सप्रेस वाहन खुद असुरक्षित सुरक्षित हैं। आवश्यक मापदंडों से अछूते वाहनों को जननी एक्सप्रेस के रूप में लगाया गया है जिससे प्रसूतिका महिलाओं की सुरक्षा पर सवालिया निशान लग रहे हैं। वहीं इस मामले के बाद जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा भी जांच पड़ताल करना मुनासिब नहीं समझा जाता और योजना के नाम पर कोरम पूरा किया जा रहा है। 

नहीं की जाती जांच पड़ताल

मापदंडों को दरकिनार कर पहले तो जननी सुरक्षा के वाहन लगा दिए गए हैं और अब मापदंडों के आधार पर जांच भी नहीं की जा रही है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है जांच की जाती है परंतु हकीकत पर गौर करें तो जांच की कार्रवाई महज औपचारिकता तक ही सीमित रहती है। जिला अस्पताल ही नहीं बल्कि जिले के किसी भी शासकीय सामुदायिक केंद्र में लगे जननी एक्सप्रेस वाहनों की पड़ताल की जाए तो भर्राशाही का खुला प्रमाण सामने आ जाएगा लेकिन जिम्मेदार अमले की नजरें इस ओर इनायतें क्यों नहीं होतीं यह समझ से परे है।

पूर्व में उजागर हो चुकी हैं कमियां

कुछ माह पूर्व जांच के दौरान जननी एक्सप्रेस में कमियां पाई गईं थीं और स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह खुलासा किया गया था कि जननी एक्सप्रेस के लिए लगे वाहनों में कुछ में ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं है तो वहीं कुछ वाहनों में नंबर प्लेट तक नहीं लगे हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जननी सुरक्षा योजना के तहत लगाए गए जननी सुरक्षा वाहनों की शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने जांच भी शुरू की थी लेकिन उसके बाद हासिल शून्य ही रह गया। 

वाहनों में नहीं हैं आवश्यक उपकरण

जिले में भर में जननी सुरक्षा योजना के तहत जननी एक्सप्रेस वाहनों को प्रसूताओं को प्रसव से पहले नजदीक स्वास्थ्य केन्द्र में पहुंचाने के लिए लगाया गया है लेकिन इन वाहनों में तय मापदंड के अनुसार सुविधाएं और आवश्यक उपकरण नहीं लगे थे जिसकी शिकायत कलेक्टर से की गई थी। शिकायत में यह आरोप लगाए गए थे कि जिला अस्पताल में लगाई गई जननी एक्सप्रेस अनियमितताओं के साए में दौड़ रही हैं। जिले में संचालित अधिकांश जननी एक्सप्रेस वाहनों के रजिस्ट्रेशन नहीं होने के अलावा उनमें जीपीआरएस सिस्टम भी नहीं लगाया जाता। 

आलम ढाक के तीन पात

टेंडर प्रक्रिया में नियमानुसार जननी वाहन में रखरखाव व सभी वाहनों के रजिस्ट्रेशन बीमा, टेक्सी, परमिट होना अनिवार्य है लेकिन नियमों का पालन कहीं भी होते नहीं देखा जा रहा है। सूत्रों की मानें तो कई जननी एक्सप्रेस वाहन को गैस सिलेंडर से चलाए जा रहे हैं। जननी एक्सप्रेस वाहनों के भौतिक सत्यापन कराने 2 नवंबर 2015 व 20 अक्टूबर 2015 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की गई थी जिसमें वाहनों के भौतिक सत्यापन कराने के साथ अनुबंध शर्तो के आधार पर वाहनों के दस्तावेजों व जीपीएस की यूजर आईडी, पासवर्ड जमा किए जाने सहित समय सीमा में निर्देशों का पालन नहीं होने पर अनुबंध समाप्त करने की मांग की गई थी लेकिन मामला जैसा का तैसा ही है।
मासूमों की जान से खिलवाड़ कर रहे स्कूली वाहन 

ओवर लोडिंग में लगाम नहीं कस रहा यातायात विभाग

कटनी। यातायात विभाग स्कूलों वाहनों में ओवरलोडिंग को लेकर गंभीर नहीं है। स्कूल वाहनों में भेड़ बकरियों की तरह स्कूली बच्चों को ठूंस-ठूंस कर भरा जाता है। विभाग अभी तक इन पर लगाम नहीं लगा पाया है। स्कूली वाहनों में ठूंस-ठूंस कर बच्चों को भरा जा रहा है और यातायात नियमों के मुंह पर तमाचा मारने का काम कर रहे हैं। 

वाहन चालकों को नहीं परवाह

जिन बसों में 40 छात्रों को बैठालने की व्यवस्था रहती है उसमें 60 से अधिक बच्चों को ढोया जाता है। इसी तरह जिस ऑटो में 5 बच्चों को बैठालने की जगह होती है उसमें 10 से 15 बल्कि उससे भी अधिक बच्चों को बैठाया जा रहा है। इधर यातायात पुलिस का कहना है कि यदि ओवरलोड पाए जाएंगे तो उन पर ठोस कार्रवाई होगी। बस में क्षमता से ऊपर जितने भी छात्र बैठे मिले तो एक सीट पर 100 रुपए के हिसाब से जुर्माना बस चालकों से वसूला जाएगा। इसी तरह ऑटो में 5 से अधिक बच्चे नहीं बैठ पाएंगे लेकिन कार्रवाई की कवायद कभी देखने को नहीं मिलती।

कार्रवाई के नाम पर  हासिल शून्य

प्रशासन, आरटीओ और पुलिस ने इस कड़ी में स्कूल प्रबंधनों को नियमों का पत्र जारी करते हुए पालन करने का पाठ तो पढ़ देते हैं, है नियमों के पालन में सती नहीं बरती जा रही है। यदि बस और ऑटो में अधिक सवारी पाई गई, तो वाहन चालकों पर जुर्माना होने के अलावा वाहन जब्त करने की कार्रवाई नहीं की जा रही है। पुलिस व यातायात विभाग ने अब तक किसी भी स्कूल बस, आटो या अन्य वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं की है।

क्षमता से अधिक बैठा रहे बच्चे

स्कूलों में करीब 200 से अधिक ऑटो स्कूली बच्चों को लाते-ले जाते हैं। वहीं करीब 100 से अधिक बसें लगी हैं, जिनसे बच्चे स्कूल जाते हंै। पिछले साल तक एक-एक ऑटो में 15 से 20 बच्चे बैठते थे, तो बसों में भी क्षमता से अधिक बच्चे लद कर जाते थे। इतना ही नहीं बसों में जरूरी साधन भी नहीं रहते हैं।

नहीं किया जाता सचेत

यातायात विभाग को स्कूल जाकर प्राचार्यों एवं बस संचालकों को दिशा निर्देश देना चाहिए और उन्हें कानून की जानकारी देते हुए बताना चाहिए कि बसों व आटो में जितनी क्षमता है उससे अधिक न बैठाएं। इसके बावजूद यदि क्षमता से अधिक बच्चे बैठाए जाते हैं तो उन पर सख्त कार्रवाई करना चाहिए लेकिन अभी तक कटनी में ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है।

आए दिन होते हैं हादसे

स्कूली वाहनों में नियमों का पालन न होने के कारण स्थिति यह बनती है कि आए दिन सड़क हादसे हो रहे हैं। पूर्व में बड़वारा क्षेत्र में स्कूली बच्चों से भरा आटो पलट गया था जिसमें कई बच्चों को चोट आ गई थी। वहीं झर्रा टिकुरिया क्षेत्र में एक छात्र की मौत भी हो चुकी थी और एनएच 7 पर भी एक बस अनियंत्रित होकर विद्युत पोल से टकरा गई थी। पूर्व की घटनाओं को ध्यान में रखकर सावधानी बरतना या वाहन चालकों को सख्त हिदायत देना जिम्मेदार अमले को मुनासिब नहीं लगता जिसके कारण वाहन मालिक भी मासूमों की जान से खिलवाड़ करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। 

Share on Google Plus

About Abhishek Mishra

www.katninews.com is first Hindi News Portal of Katni District. You can get latest Hindi News updates.

0 टिप्पणियाँ:

एक टिप्पणी भेजें