खुले में शौच पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

कटनी। मध्यप्रदेश शासन नगरीय विकास एवं आवास विभाग भोपाल के निर्देशानुसार स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत निर्धारित कार्यक्रम के तहत विगत दिवस निगमायुक्त संजय जैन द्वारा स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक ली गई। बैठक में कार्यपालन यंत्री राकेश शर्मा, प्र. स्वास्थ्य अधिकारी एम.एल. निगम, समस्त स्वास्थ्य निरीक्षक तथा वार्ड सफाई दरोगा उपस्थित रहे, खुले में शौच से मुक्त करने कर लक्ष्य निर्धारित किया गया है, अत: शासन निर्देशानुसार  02 अक्टूबर 2016 से निर्धारित प्रक्रिया अनुसार नगर व वार्डो में खुले में शौच से मुक्त कराने का कार्यक्रम चलाया जा रहा है। स्वच्छता अभियान के तहत मच्छरो के नियंत्रण हेतु वार्ड वाईज कार्यक्रम तैयार कर फागिंग मशाीन चलाई जावे, तथा नगर के मुख्य मार्गो में आवारा सुअर/मवेशियों के पकडने हेतु हाका गेंग तैयार की जाकर आवारा मवेशियों के नियंत्रण हेतु अभियान चलायें, ताकि नगर के मुख्य मार्गो से यातायात में एक ओर जहां अवरोध नहीं होगा, वही दूसरी ओर गंदगी से छुटकारा मिल सकेगा। नागरिक यह ठान ले कि न वह गंदगी करेगा न करने देगा, तो जाहिर है, तो किसी के झाडू उठाने की नौमत नहीं आयेगी। दरसल किसी भी सार्वजनिक समस्या का समाधान कई चरणों से गुजरता है, क्यों कि इससे विभिन्न मानसिक स्तरों वाले लोगों की बहुत बडी आबादी जुडी होती है, सबसे पहले सारे स्तरो पर यह संदेश पहुंचता है कि यह समस्या है। यह गंभीर समस्या है, जो कई अन्य समस्याओं का कारण है। इसे ही जन जागरण कहते है, इसके बाद सरकारी पहल का इंतजार होता है, और पहल होने पर लोग उसमें सहयोग करते है, जैसे वार्डो के प्रत्येक घरो से कचरा इकटठा करने की प्रक्रिया में वार्डवासी सहयोग दे रहे हंै, फिर समस्या को दूर करने हेतु स्वयं प्रेरणा ले कर दूसरों को प्रोत्साहित करते हैं। स्वच्छता हमारी आदत होगी, देर चाहे जितनी लगे, वह वक्त आयेगा जरूर स्वाव्छता अभियान का एक पहलू यह भी है कि हर घर में शौचालय की व्यवस्था हो, जागरूक्ता जब आदत में बदलेगी तभी आयेगी स्वच्छता। नगर के बाहरी वार्ड/क्षेत्र में जहां खुले में शौच के लिये आमजन मानस अभी भी जाते है, खुले में शौच को प्रतिबंधित करने हेतु वार्ड सफाई दरोगा/स्वच्छता निरीक्षक गांधी वांदी तरीके से खुले में शौच न करने हेतु समझाइस दे, जो नागरिक खुले में शौच जाने का आदतन तथा समझाइ्रस के बावजूद भी नहीं मानता है। कार्य योजना बनाकर बैधानिक दृष्टि से इण्डियन पेनल कोड की धारा 269, 270, 278, 279, 336 के तहत कार्यवाही प्रस्तावित की जावे। वाह क्षेत्र के वार्ड जहॉं अभी भी नागरिक जहां खुले में शौच आदि के लिये जाते हैं, समझाने में नहीं मानते है, आदतन हैं, उन्हीं वार्ड के ऐसे आदतन नागरिक को इण्डियन पेनल रोड के तहत कार्यवाही प्रस्तावित की जाकर कुछ उदाहरण प्रस्तुत करें, ताकि खुले में शौच की प्रथा शासन के मंशानुसार समाप्त करने की कार्यवाही की जा सके।
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