छेड़छाड़ व लैंगिग उत्पीड़न रोकने स्कूलों में नहीं दिख रहा आईसीसी का वजूद


अजय त्रिपाठी/ कटनी। जिले के सभी शासकीय हाईस्कूल व हॉयर सेकेंडरी स्कूलों में महिलाओं के साथ लैंगिक उत्पीडऩ रोकने के लिए आंतरिक परिवाद समिति (आईसीसी) का गठन किया जाना था लेकिन स्कूलों में अभी तक आईसीसी का वजूद देखने को नहीं मिल रहा है। समिति के गठन का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में काम करने वाली महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी घटना की जांच कर दोषियों के खिलाफ  कार्रवाई कराना है जिसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा समस्त प्राचार्यों को समिति गठित करने के लिए निर्देश भी जारी किए गए थे।
तीन साल पहले बना था अधिनियम
गौरतलब है कि महिला सशक्तिकरण विभाग प्रमुख के माध्यम से समिति गठित करने के बाद कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश थे। सरकारी व निजी दफ्तर या स्कूलों में काम करने वाली महिलाओं के साथ छेड़छाड़ या लैंगिक उत्पीडऩ को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने तीन साल पहले अधिनियम बनाया था। कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीडऩ प्रतिषेध अधिनियम 2013 नाम से बने इस अधिनियम में प्रावधान है कि जिस दफ्तर या कार्यस्थल पर 10 या इससे ज्यादा कर्मचारी हैं, वहां हर हाल में आंतरिक परिवाद समिति (आईसीसी) का गठन किया जाए।
121 स्कूलों में होना  था समितियों का गठन
स्कूलों में समिति के गठन के पीछे मुख्य उद्देश्य यही है कि वहां महिलाओं के साथ होने वाली किसी भी अप्रिय घटना की शिकायत की जांच निष्पक्ष तरीके से करवाने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की जा सके। जिला मुख्यालय समेत बड़वारा, विजयराघवगढ़, रीठी, बहोरीबंद, ढीमरखेड़ा क्षेत्र के सभी 121 सरकारी हाई व हॉयर स्कूलों के प्राचार्यों को दफ्तरों या संस्थान में आईसीसी का गठन होना था और जिला शिक्षा अधिकारी ने सभी प्राचार्यों को पत्र भी जारी किए थे लेकिन स्कूलों में आईसीसी का अस्तित्व अब तक नजर नहीं आ रहा है।
आईसीसी न बनने पर लगेगा जुर्माना
तत्कालीन कलेक्टर प्रकाश जांगरे ने शीघ्र ही समिति गठित करने के निर्देश जारी करते हुए आंतरिक परिवाद समिति गठित न होने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना किए जाने की चेतावनी दी भी दी थी परंतु किन-किन स्थानों में समितियों का गठन हुआ या जहां समिति गठित नहीं हुईं वहां जुर्माना कब लगाया गया इसकी जानकारी जिम्मेदारों के पास भी नहीं है। नियम के अनुसार आंतरिक परिवाद समिति में 4 सदस्यों का चयन किया जाना है जिसमें पहली सदस्य पीठासीन अधिकारी एक महिला अधिकारी होगी। वरिष्ठ स्तर की महिला न होने पर अन्य कार्यालयों से प्रशासनिक यूनिटों से महिलाएं नामांकित की जा सकती हैं।
आधे से ज्यादा होंगी महिला सदस्य
दो महिला सदस्य रहेंगी जो महिलाओं की समस्याओं के लिए प्रतिबद्ध होगी या समाज सुधार कार्य का अनुभव या विधिक ज्ञान रखती होंगी। समिति में एक अशासकीय सदस्य होगा, जो महिलाओं की समस्याओं के प्रति प्रतिबद्ध है या ऐसा कोई व्यक्ति, जो लैंगिक उत्पीडऩ संबंधी मुद्दों से परिचित हों। समिति में कम से कम आधे सदस्य महिलाएं होंगी। जिले के किसी भी स्कूल में महिला शिक्षकों के साथ अभद्रता आदि करने पर नियमानुसार आरोपी के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
अश्लील हरकत करने पर होगी कार्रवाई
आईसीसी के गठन के बाद नियमानुसार शारीरिक संपर्क अंगक्रियाएं करने, लैंगिक स्वीकृति के लिए मांग, लैंगिक आभास वाली टिप्पणी, अश्लील साहित्य दिखाने, लैंकिग प्रकृति का कोई अन्य निंदनीय शारीरिक, शाब्दिक व गैर शाब्दिक कृत्य करने पर कार्रवाई की जा सकेगी परंतु  निर्देशों के बावजूद अभी तक आईसीसी को सफल रूप नहीं दिया जा सका है।
इनका कहना है-
महिला शसक्तिकरण विभाग प्रमुख के माध्यम से आईसीसी का गठन करने के निर्देश हैं लेकिन अभी तक कहां कहां आंतरिक परिवाद समितियों का गठन हुआ है इसकी जानकारी अपडेट नहीं हो पाई, 30 मार्च तक जानकारी मिल सकेगी तब ही इस विषय में कुछ स्पष्ट हो सकेगा।
वनश्री कुरैवैती, महिला सशक्तिकरण अधिकारी
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