परिवादी को बीमा रकम सहित छतिपूर्ति देने के आदेश, जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय ने आदेश किया पारित


निर्धारित समयावधि में छतिपूर्ति व वाद व्यय ना देने पर देना होगा 8 प्रतिशत वार्षिक ब्याज
कटनी (18 अप्रैल)- मंगलवार को जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण निर्णय पारित करते हुये परिवादी को बीमा राशि के साथ ही छतिपूर्ति राशि, व्यय सहित लौटाने संबंधी निर्देश जारी किये हैं। जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय के निर्णय अनुसार एक वर्ष पूर्व सीएलपी वार्ड कटनी निवासी परिवादी मनीष कुमार पाण्डेय आत्मज विनोद पाण्डेय ने जिला उपभोक्ता फोरम में लाईफ इन्श्योरेन्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा ब्रांच मैनेजर, ब्रांच ऑफिस जबलपुर रोड, बरगवां कटनी व लाईफ इन्श्योरेन्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा डिविजनल मैनेजर, डिविजन ऑफिस, जीवन प्रकाश, मदन महल नागपुर रोड के विरुद्व शिकायत की थी। जिसमें परिवादी मनीष कुमार पाण्डेय ने बताया था कि उसने अनावेदकगण के यहां बीमा पॉलिसी कराई थी। जिसकी किश्तें वह नियमित रुप से जमा कर रहा था।
            इसी दौरान दिनांक 15 अक्टूबर 2013 को मुड़वारा स्टेशन के पास रेल से उतरते समय उसके साथ दुर्घटना हुई थी। जिसके मद्वेनजर परिवादी के हाथ-पैर में चोटें आई थीं। जिससे परिवादी को अपंगता कारित हुई थी। परिवादी ने अनावेदक के कार्यालय में दुर्घटना के बाद अपनी बीमा पॉॅलिसियों की शर्त क्रमांक 10(2)(ए) अनुसार अपंगता हितलाभ राशि भुगतान के लिये आवेदन किया था। लेकिन अनावेदकों के द्वारा परिवादी को उसका लाभ नहीं दिया गया। परिवादी ने अनावेदकों के वरिष्ट अधिकारियों को भी इस संबंध में शिकायत की थी। उसके बाद भी परिवादी को दुर्घटना हितलाभ प्रदान नहीं किया।
            परेशान होकर परिवादी ने अनावेदकों को अधिवक्ता के माध्यम से सूचना पत्र दिया। उसके बाद भी अनावेदकों ने परिवादी को बीमा पॉलिसियों की शर्त अनुसार राशि का भुगतान नहीं किया। तत्पश्चात परिवादी ने जिला उपभोक्ता फोरम न्यायालय की शरण ली और दुर्घटना हितलाभ दिलाने के लिये न्यायालय में अपनी शिकायत दर्ज कराई। जिस पर जिला उपभोक्ता फोरम के अध्ययक्ष आर0जी0 कोठे, सदस्य रेखा पाण्डे, रेखा राय की बेंच ने, सारे तथ्यों पर गंभीरता से विचार करने के बाद अनावेदकों के विरुद्व निर्णय पारित करते हुये, परिवादी को नियमानुसार बीमा पॉलिसी की राशि देने के साथ ही मानसिक छति के रुप में 5 हजार और वाद व्यय के रुप में 2500 रुपये, एक माह के अंदर देने संबंधी निर्देश जारी किये हैं।
            साथ ही आदेश में कहा गया है कि यदि अनावेदकों के पत्र दिनांक 11 नवंबर 2016 के अनुसार रुपये 67499.16 रकम, परिवादी को बैंक खाते के माध्यम से भुगतान की गई हो, तो इस राशि को कम कर समायोजित किया जाये। छतिपूर्ति राशि और वाद व्यय का भुगतान लाईफ इन्योरेन्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के ब्रान्च मैनेजर, ब्रांच ऑफिस, कटनी और एलआईसी के डिविजनल मैनेजर, एक माह के भीतर अदा करें। निर्धारित समयावधि में परिवादी को राशि अदा नहीं करने पर परिवादी, अनावेदकों से 8 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज दर से रकम प्राप्त करने का अधिकारी होगा।
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