साहब हमारी जमीन वापस करा दो... पीड़ित किसानों ने उठाई मांग, पुलिस ने किया गिरफ्तार


राजेश सिंह/कटनी। किसानों की समस्याओं को लेकर मंदसौर से भड़के किसान आंदोलन के बाद कटनी में भी लगभग 800 एकड़ किसानी जमीन गवां चुके लगभग 100 किसानों ने आज रैली निकालते हुए कचहरी गेट के सामने अपनी मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठ गए। किसानों का आरोप है कि 2010 में उनकी जमीनों को बिना उनकी सहमति के वेलस्पन कंपनी को सौंप दी गई। कंपनी की बर्बरता का शिकार हुए किसान तभी से अपनी जमीन को पाने के लिए संघर्षरत है। लेकिन शासन और जनप्रतिनिधियों ने उनकी बातों को अनसुना करते हुए जबरन वेलस्पन कंपनी को वर्ष में चार बार फसल देने वाली भूमि पर कब्जा करा दिया गया। किसान खेती करने से वंचित रह इसके लिए कंपनी ने जेसीबी मशीन से खेतों में बड़े-बड़े गड्ढे कर दिए। यही नही राजस्व रिकॉर्ड में भी उनके नाम की जगह वेलस्पन कंपनी का नाम दर्ज कर दिया गया है। जबकि इन किसानों ने किसी से भी अपनी भूमि के एवज में कोई मुआवजा राशि नही ली है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसानों के स्वामित्व की भूमि कंपनी के नाम कैसे दर्ज कर दी गई।
भुखमरी की कगार में किसान

किसानों को अपना भगवान कहने वाली सरकार शायद अब भस्मासुर का रूप ले लिया है। जो अपने की भगवान को खत्म करने का प्रयास करने लगा था। आज पूरे प्रदेश में किसानों का गुस्सा फूटकर सामने आया है। कटनी के बुजबुजा-डोकरिया के किसान पिछले 7 वर्षो से लगातार संघर्ष करते-करते भुखमरी के कगार पर आ चुके है। इस दौरान मुख्यमंत्री शिवराज कई बार कटनी आये लेकिन उनकी नजर इन किसानों पर नही पड़ी। जबकि वो चाहते तो बेहतर कम्युनिकेशन से किसानो की समस्याओं को सुलझा सकते थे। लेकिन ऐसा लगता है कि शायद अब देश मे किसानों की नही व्यवसायियो की ज्यादा जरूरत है। इसलिए जनता के खून-पसीने की कमाई को बिजनेस कॉन्क्लेव जैसे आयोजनों में करोड़ो रूपये फूंक दिए जाते है और अमीर घरानों को अपनी पलके बिछाकर इंतजार करते है। उसके बाद शुरू होता है किसानों को दमन करने का घिनौना खेल जहां उनकी सहमति और मुआवजे के बिना ही जमीनों का नामांतरण कर उन्हें बेदखल कर भुखमरी के कगार पर ढकेल दिया जाता है।
धमकाती नजर आई पुलिस, अंत मे किया गिरफ्तार

डोकरिया-बुजबुजा के किसान जमीनों को वापस लेने के संघर्ष की लड़ाई लड़ते हुए कलेक्ट्रेट गेट के सामने भूख हड़ताल पर बैठ गए। जब प्रशासन को इसकी खबर मिली तो दल-बल के साथ पुलिस प्रशासन किसानों की भूख हड़ताल को खत्म करने के लिए कई प्रकार आए धमकाती नजर आई। किसानों ने सरकार की इस दमनकारी नीति के विरुद्ध राष्ट्रपति से ज्ञापन के माध्यम देकर न्याय की गुहार लगाई है। वही प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि उनके भूख हड़ताल को खत्म करने के लिए किसी भी हद तक जा सकती है। फिलहाल पुलिस ने भूखहड़ताल पर बैठे किसानों को गिरफ्तार कर लिया है।
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